सुनीता विलियम्स की वापसी: 9 महीने बाद स्पेस से लौटे NASA Astronauts | ISS News 2025
मिशन की शुरुआत
नासा की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विलमोर ने 9 महीने तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) में रहने के बाद सफलतापूर्वक पृथ्वी पर वापसी की। यह मिशन शुरू में केवल 8 दिनों का था, लेकिन बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट की तकनीकी समस्याओं के कारण यह यात्रा अप्रत्याशित रूप से लंबी हो गई।
आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक वापसी की पूरी कहानी, मिशन की चुनौतियाँ, और इसका भविष्य के स्पेस मिशनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
9 महीने बाद स्पेस से वापसी: मिशन की चुनौतियाँ और उपलब्धियाँ
सुनीता विलियम्स भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री हैं। उनका जन्म 19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो में हुआ था। उनके पिता दीपक पंड्या भारतीय थे और माता बोनी पंड्या स्लोवेनियाई मूल की थीं।
महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ:
- 2006 में पहली बार ISS गईं और 195 दिनों तक वहाँ रहीं।
- 2012 में दूसरी बार ISS मिशन पर गईं और 127 दिन बिताए।
- स्पेसवॉक (अंतरिक्ष में चहलकदमी) करने वाली दुनिया की सबसे अनुभवी महिला।
- नासा के आर्टेमिस मिशन (जो 2030 तक चंद्रमा और मंगल पर जाने की योजना बना रहा है) का भी हिस्सा रही हैं।
मिशन की शुरुआत और अनपेक्षित देरी
कैसे शुरू हुआ मिशन?
यह मिशन जून 2024 में शुरू हुआ, जिसमें सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर को बोइंग स्टारलाइनर नामक एक नए स्पेसक्राफ्ट में ISS भेजा गया था। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य स्टारलाइनर के पहले मानवयुक्त परीक्षण को पूरा करना था।
बोइंग स्टारलाइनर में तकनीकी समस्या
- स्टारलाइनर को 8 दिनों बाद पृथ्वी पर लौटना था।
- लेकिन जब यह ISS से डॉक हुआ, तब इसमें प्रणोदन प्रणाली (propulsion system) की खराबी पाई गई।
- इंजन में लीक और कंप्यूटर गड़बड़ियों के कारण इसे वापस लाना संभव नहीं था।
- अंततः, नासा ने बोइंग स्टारलाइनर को बिना क्रू के पृथ्वी पर वापस भेजा और अंतरिक्ष यात्रियों को ISS पर ही रहने का फैसला लिया।
स्पेसएक्स ड्रैगन से सुरक्षित वापसी
- 18 मार्च 2025 को सुबह 10:35 बजे (IST), स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ISS से रवाना हुआ।
- 19 मार्च 2025 को सुबह 3:27 बजे (IST), यह फ्लोरिडा तट के पास अटलांटिक महासागर में सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन हुआ।
- इस लैंडिंग के दौरान कुछ डॉल्फ़िन्स भी देखी गईं, जिससे यह दृश्य और भी यादगार बन गया।
9 महीने अंतरिक्ष में रहने की चुनौतियाँ
1. शरीर पर असर
- अंतरिक्ष में भारहीनता (zero gravity) के कारण हड्डियाँ और मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं।
- सुनीता और उनकी टीम को रोज़ाना 2 घंटे एक्सरसाइज़ करनी पड़ी ताकि शरीर फिट रहे।
- पृथ्वी पर लौटने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए चलने-फिरने में मुश्किल होती है।
2. मानसिक चुनौतियाँ
- 9 महीने तक बंद माहौल में रहना मानसिक रूप से कठिन होता है।
- टीम को ISS पर मनोरंजन और योग तकनीकों का सहारा लेना पड़ा ताकि मानसिक तनाव से बचा जा सके।
3. पृथ्वी पर लौटने के बाद मेडिकल परीक्षण
- लैंडिंग के बाद, सुनीता और उनकी टीम का विस्तृत मेडिकल परीक्षण किया गया।
- यह सुनिश्चित किया गया कि वे लंबे समय तक माइक्रोग्रैविटी में रहने के कारण किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से ग्रस्त नहीं हैं।
भविष्य के स्पेस मिशन पर प्रभाव
1. क्या बोइंग स्टारलाइनर अब विश्वसनीय रहेगा?
बोइंग स्टारलाइनर की यह असफलता एक बड़ी चुनौती साबित हुई है। नासा अब इसकी पूरी समीक्षा करेगा और तय करेगा कि भविष्य में इसे मानव मिशनों के लिए फिर से इस्तेमाल किया जाए या नहीं।
2. स्पेसएक्स की भूमिका और भविष्य
स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन एक विश्वसनीय विकल्प साबित हुआ। इससे साबित होता है कि भविष्य में नासा को बोइंग की तुलना में स्पेसएक्स पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ सकता है।
3. चंद्रमा और मंगल मिशन पर क्या असर पड़ेगा?
नासा का आर्टेमिस मिशन, जिसमें चंद्रमा और मंगल पर मानव भेजने की योजना है, इस घटना से प्रभावित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि नासा अपनी रणनीति में क्या बदलाव करता है।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ
इस मिशन की वापसी पर लोगों ने सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ दीं:
✔ नासा और स्पेसएक्स की सफलता की तारीफ की गई।
✔ बोइंग स्टारलाइनर की असफलता पर आलोचना भी हुई।
✔ सुनीता विलियम्स की हिम्मत और धैर्य की जमकर सराहना हुई।
नासा के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर लिखा गया:
"Splashdown Confirmed! 🚀 Crew-9 is now back on Earth in their @SpaceX Dragon spacecraft. Welcome home!"
Conclusion:-
सुनीता विलियम्स और उनकी टीम की यह वापसी अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटना है। यह मिशन स्पेस टेक्नोलॉजी, मानसिक और शारीरिक सहनशक्ति और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए कई नए सबक छोड़ गया है।
हालाँकि, बोइंग स्टारलाइनर की विफलता से सबक लेते हुए, नासा और अन्य अंतरिक्ष एजेंसियों को भविष्य में अंतरिक्ष मिशनों को और सुरक्षित और प्रभावी बनाने की दिशा में काम करना होगा।
0 Comments